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मेरे मन की

क्या पता है तुम्हे?

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आज कल कुछ हुआ सा जा रहा है,
मेरे दिल में क्या पता है तुम्हें|
मुझे सुनाई देती हैं बातें तेरी,
क्या पता है तुम्हें||
कभी तो दिन में भी,
देखता हूँ सपने तेरे|
इन खुली आँखों,
क्या पता है तुम्हें||
खोजती है आँखें मेरी,
सुबहो-शाम, हरपल तुम्हें|
तड़पता है ये मिलने को तुमको,
क्या पता है तुम्हें||
चंद लफ्जो को गर,
ना सुनु तो बैचेन हो जाता हूँ|
तेरे शब्दों को सुनकर मिलती है राहत,
क्या पता है तुम्हें||
बस एक ही ख़्वाहिश है मेरी,
जब तक जिन्दा हूँ तेरा दीदार होता रहे|
और मरकर भी याद रहे तुझको,
क्या पता है तुम्हें||
#meremankee

अजब-गजब

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ये दुनिया देती हैं उसको,
जिसके पास ढेर सारा है |
उसको देती नही,
जो किस्मत का मारा है ||
किसी गरीब के बुलाने पर,
लोग जाने को नहीं तैयार हैं |
और रसूख वाले के यहाँ,
करते दिन-रात दरबार है ||
अनपढ को बात करने,
लायक भी नहीं समझते हैं |
लेकिन अंगुठाछाप मालिको को,
करते झुककर सलाम है ||
पैसे से बढकर नही कुछ,
इस जहां में भाई |
इन कागज के टुकड़ों को,
करते हम भी प्रणाम है ||
मेरे मन की

मेरे मन की

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असहिष्णुता व सहिष्णुता

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आजकल चर्चा है इसी बात पर की,
ज़माना असहिष्णु होता जा रहा है |
कोई वापस देता तमगा है,
तो कोई घर छोड़ जा रहा है ||

मै तो हूँ अचंभित,
सब को दिख रही असहिष्णुता,
दुम दबा के मुझसे ही,
क्यों भगा जा रहा है ||

मैंने खोजा सब जगह,
खेत-खलिहान, बाग़-बगीचे |
अन्दर-बाहर, सड़क और नदी,
पर मुझे तो कही दिख ना रहा है ||

कही फटा बम,
तो कही हो रहा हमला |
लेकिन पता नहीं क्यों,
यह भारत में ही भगा जा रहा है ||

सभी से मेरा एक ही निवेदन है,
गर मिले असहिष्णुता का पता,
दया कर मुझको बताना,
यह कहा रह रहा है ||

@ऋषभ शुक्ला

नोट :- सभी चित्र गूगल से लिए गए है |

चलो सियासत कर आये

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चलो हम राजनीति के,
चर्चित चहरे बन जाए |
चलो हम दिल्ली वाली,
पाठशाला से दांव सिख आंये ||

कुछ झूठी, कुछ मक्कारी,
सीख बड़ी बाते चालक बन जाए |
हम खोखली हंसी ओढ़,
मौकापरस्त बन जांए ||

कोई कुछ भी करे, कहे,
हमें फर्क ना पड़ता |
चलो कुछ सफेद खद्दर वालो पर,
कीचड़ फेक आये ||

हर जुगत से कैसे भी,
बस कुर्सी मिल जाए |
भले ही सफेद खद्दर पर,
कितने ही कीचड़ खिल जांए ||

ना मिले अगर सत्ता फिर भी,
जीते हुए के भाई बन जाए |
दोनों एक दुसरे के कीचड पोछ,
नेता बन जाए ||

अगर बनो विपक्षी,
तो कर दो दंगा |
भर दो विष इतना अन्दर,
भाई ही भाई का दुश्मन बन जाए ||

अगंर न हो गुण ये सभी,
नेता के चमचे बन जांए |
उनकी हाँ में हाँ निलाकर,
उनके हम खास बन जांए ||

चलो हम इस गंदी राजनीति को,
और गन्दा कर आंये |
चलो नेता बन जाए,
चलो सियासत कर आंये ||

नोट :- सभी चित्र गूगल से लिए गए है |

देश के भविष्य

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बच्चो,
तुम इस देश के भविष्य हो,
तुम दिखते हो कभी,
भूखे, नंगे ||

कभी पेट की क्षुधा से,
बिलखते-रोते.
एक हाथ से पैंट को पकड़े,
दूजा रोटी को फैलाये ||

कभी मिल जाता है निवाला
तो कभी पेट पकड़ जाते लेट,
होली हो या दिवाली,
हो तिरस्कृत मिलता खाना ||

जब बच्चे ऐसे है,
तो देश का भविष्य कैसा होगा,
फिर भीबच्चो,
तुम ही इस देश के भविष्य हो ||


नोट :- सभी चित्र गूगल से लिए गए है |

मिट्टी के दिये

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दिवाली चली गयी,
सब फिर से,
हो गए अस्त-व्यस्त ||

लाये थे सजोकर,
कुम्भार के घर से,
कही गिर कर टूट ना जाये,
बड़े ही नाजुक है ||

उसमे भर घी और बाती,
सजाकर रख दिए,
घर-आंगन, और छत पर ||

पूरा संसार हो गया प्रकाशित,
दूर हो गए अन्धकार |
सब सो गए,
छोड़ इन्हें अकेला ||

लेकिन ये जागते ही रहे,
अविचलित, अडिग
एक सजग प्रहरी की भाती ||


और फिर सयंम रूपी घी,
साथ छोड़ गया,
बाती भी वीरगती को प्राप्त हुई ||

सुबह निचे पड़े अपनी,
खुद की तलाश में,
होकर टुकड़े, बिखर गए,
ये मिट्टी के दिए ||

मनो कह रहे हो,
मिट्टी से आये थे
मिट्टी में ही मिल गए,
ये मिट्टी के दिए ||

नोट :- सभी चित्र गूगल से लिए गए है |