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मेरे मन की

गौ माता

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जो क़त्ल करते है,  उन्हें कैसे बद्दुआ दू बचपन से दुध मेरा ही तो पीया है||
मेरी पुछ पकड़कर खेला है ये, कभी डरता, आगे आता और वापस चला जाता, लेकिन सुख - दुःख में मेरे साथ ही तो जीया है||
माँ के बाद एक मै ही तो थी, जो समझ सकती थी इसे, कल इसे अपना दुध रुपी प्रेम, आज शरीर भी दिया है||
अब ना इसे मेरी जरूरत रही, और मै अब बूढी भी हो चली हूँ, मुझे बेचकर चंद पैसे मिल जायेंगे इसे, मैंने भी कब इनकार किया है ||
गर मेरे खून देखकर भी, तेरे चहरे पर मिल जाए खुशी, तो मै भगवान से खुद के लिए दो  मौत मांग लिया है||
जो मेरी गर्दन काटेगा,  वो भी तो मेरा ही बेटा है, उसने भी तो बचपन में, मेरा ही दुध पीया है ||
मेरी दुध के हर एक कतरा तेरा, शरीर तेरा, मांस तेरा, जिस्म तेरा, मेरी खुशी तो बस इतने में है की सारे हिंदुस्तान ने मुझे अपनी माँ मान लिया है||
@ऋषभ शुक्ला 

तुम सहते जाना

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तुमको अगर कोई कुछ भी कहे, तुम कुछ ना कहना| लोग तुम्हें चाहे दे गाली, तुम सहते जाना||

तुम्हें करे विश्व बदनाम, बस मौन साधना| करे अन्याय का वार, तुम सहते जाना||

तुम हो सहिष्णु भारतीय, तुम्हारा धैर्य ही अभिमान है| गर कहे तुम्हें असहिष्णु, तुम सहते जाना||

सहते रहे हम सदा, किन्तु अब ना सहना| माँ भारती पर हो रहा है वार, अब तुम चुप ना रहना||

नींद से जागो हे वीर पुरुष, परशुराम बन जाओ तुम| इन देश के दुश्मन कायरो को, सर्वनाश कर जाओ तुम||

वक्त

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कहते हैं वक्त किसी का नहीं होता, हर वक्त बदलता रहता है| वक्त का मारा, इस दुनियां के सितम सहता है||

कल के बच्चे जो, खुद के पैरो पर खड़ा भी भी नहीं हो पाता था| अब कभी भी सीना ताने, सामने पाता हूँ||

कल जिसके पहले शब्द को, सुनने को लालायित रहता था मै| आज वो मुझे, सुनना चाहता ही नहीं||

ये वक्त का ही तो तकाजा है, कि कल अपने सपनो को बेचकर| जिसके लिये खुबसुरत पल बुना, वही चौराहे पर मेरी बोली लगा गया||

मेरे वक्त ने तो इस कदर मारा, कि मै अकेला हो गया| डरता तो मै उसके लिये हूँ, कही वह भी वक्त का शिकार ना हो जाये||

चिट्ठा दिवस

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आप सभी को ब्लॉगर दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ|
ब्लॉग तो पहले भी लिखे जा रहे थे, लेकिन हिन्दी भाषा में ब्लॉगो के लिखे जाने की शुरुआत कुछ वर्ष पहले हुई| लेकिन शुरुवात मे हिन्दी प्रेमीयों के पढने का माध्यम या तो पुस्तकों को बनाते थे या पत्रिकाओं को| लेकिन धीरे-धीरे हिन्दी ब्लॉगो पर पाठको की संख्या मे असाधारण बढ़ोतरी ने हिन्दी लेखको को ब्लॉग लिखने के लिए प्रोत्साहित किया| और आज तो हिन्दी पाठको के लिये एक सशक्त माध्यम के रूप मे उभरा है हिन्दी ब्लॉगींग| और ब्लॉग से हिन्दी के दिन सुधरे, ना सुधरे लेकिन हिन्दी से ब्लॉगींग के दिन जरूर सुधरेंगे| और हमारी तो यही विश्वास है कि हिन्दी चिट्ठा और चिट्ठाकार इसी तरह प्रगति करते रहे| सभी ब्लाग लेखको और पाठको को चिट्ठा दिवस की हार्दिक बधाई|
#हिंदी #ब्लॉग

दिन के तारे

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दिन के भी तो तारे होते है, सही समझे, कभी ना दिखते , लेकिन सुना है सुन्दर होते है, दिन के तारे|
दूर से खूब चमकते, बड़े ही सुन्दर होते, जो पास आकर हो जाते है धुंधले, दिन के तारे|
आस बड़ी होती है इनसे, बढ़ी होती उम्मीदे, धुंधला कर जाते है जीवन, दिन के तारे|
बड़े से सपने है ये दिखाते, बड़े-बड़े नारे लगवाते, क्षणिक सुख का अनुभव करवाते, दिन के तारे|
अंत मे निराशा देकर, सपनो को बिखेरकर, छिप जाते है आकाओं के दामन मे ये, दिन के तारे|
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