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Krishna Janmashtami / कृष्णा जन्माष्टमी |
Krishna Janmashtami / कृष्णा जन्माष्टमी
आओ रे मेरे गोपाल,
नंद तेरी राह तके है|
कभी कान्हा, श्याम,
कृष्णा मुरारी, घनश्याम कहे है||
तेरे बिन सूखी यमुना,
सुनने को बंशी गोपियाँ भी प्यासी है|
तेरे कदमो के स्पर्श का विछोह,
कदम के पेड़ो ने कई वर्ष सहे है||
गैया भी अपने चरवाहे को ढूंढे,
सोचे मेरे दूध को कान्हा काहे ना पिए है|
आजा मेरे लल्ला,
यशोदा कहे है||
बुलाते है नंद-यशोदा और देवकी-वासुदेव,
ब्रज, गोकुल मथुरा और वृन्दावन तेरी बाट जोहे है|
कभी कान्हा, श्याम,
कृष्णा मुरारी, घनश्याम कहे है||
ऋषभ शुक्ला
Hindi Kavita Manch / हिंदी कविता मंच
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