खट्टा - मीठा

ये है जीवन के दो पल,
कभी खट्टा, कभी मीठा । 
सुबह से लेकर शाम,
कभी बच्चा, जवान और बूढ़ा ॥

कभी मै हुआ था,
बहुत ही दुखी । 
और ये सोचा की,
पहले मै था तो सुखी ॥ 

मैंने ये सोचा,
मै क्यों हूँ दुखी । 
इससे पहले भी तो,
मै था दुखी ॥ 

जन्म से लेकर आज तक,
हुआ ना सुखी । 
क्यों मै हूँ अपने,
आज पर दुखी ॥ 

जब पापा ने बचपन में डाटा,
तो मै खूब था रोया ॥ 
फिर एक बर्फ के गोले ने,
दे दी खुशी ॥ 

दहलीज पर आयी जवानी,
जिम्मेदारी और परेशानी से हो गया दुखी । 
और बच्चे की किलकारी,
देती है खुसी ॥ 

बुढ़ापे में जब मै हुआ था कमजोर,
तब तो हुआ मै ज्यादा दुखी । 
बेटे और पोतो के संग मस्ती,
कर देती है मुझको सबसे सुखी ॥ 

ये हूँ मेरे जीवन की सारी कथा,
जिसमे हूँ मै सुखी और दुखी ।
पर शायद मै अब जाकर चिता पर,
खुद पर हूँ मन ही मन खुसी ॥ 

सुख और दुःख है,
इस जीवन के दो पहलू । 
हमेशा चलो,
समय के साथ ॥ 

ना कभी करें,
भविष्य की चिंता । 
ना करो अफ़सोस,
और हो उदास ॥  
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