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Showing posts from May 30, 2015

मां के गर्भ में था महफूज

मै था माँ के गर्भ में एकदम महफूज,
लिये एक सुन्दर एहसास |
मै था उतावला आने को बाहर ,
माँ के पास ||


वो भी थी मन ही मन 
वो मुझे बिना छुए ही ,
प्रसन्न और पुलकित |
वो थी मेरे बारे में जानने को ,
जिज्ञासु और उत्कंठित ||

एक अलग स्पर्श का अनुभव करती थी |
और मुझको लेकर दिन में ही ,
न जाने क्या सपने देखा करती थी ||