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Tuesday, August 1, 2017

हमें जीने दो




पापा ! पापा ! मुझे जीने दो
मुझे आने दो !
इस अदभुत दुनिया की
एक झलक तो पाने दो !!

मैंने क्या किया है बुरा
जो तुम चाहते हो मारना !
मै तो अभी आयी भी नहीं
और तुम चाहते हो मुझे निकालना  !!

पापा आप जब ऑफिस से घर आयेंगे
थक हार कर चूर हो जायेंगे  !
फिर मै आपको पापा बुलाऊँगी
आप सारी थकान भूल जायेंगे !!

मैं बिलकुल भी जिद ना करूंगी
आप सब से डरूँगी  !
बड़े प्यार से रहूँगी
कभी गुस्सा ना करूंगी !!

लेकिन हम तो एक बच्चा चाहते थे
लड़का होनहार और सच्चा चाहते थे !
जो हमें चारो धाम की यात्रा और सेवा करेगा
हम तो लडके के रूप में लाटरी चाहते थे  !!

तेरी शादी मै कैसे करूंगा
बैंक का कर्ज मैं कैसे भरूंगा !
मेरी नौकरी भी चली जायेगी
मैं तेरी परवरिश कैसे करूंगा !!

पापा ! मैं नौकरी करूंगी
किसी के घर झाड़ू बर्तन ही करूंगी !
और धीरे-धीरे करके
 सभी कर्ज भरूँगी  !!

आप सब की दिन-रात सेवा करूंगी
आपके बुढ़ापे का सहारा बनूंगी  !
मुझे आने दीजिये
मै आप सब की आंखो का तारा बनूंगी !!

फिर वो माँ से प्रार्थना करती है

माँ तू तो माँ है
 फिर तू ऐसा कैसे करेगी !
क्या तू अपनी इस
 नन्ही सी जान को कुचल सकेगी !!

जिस नन्ही सी जान को
   महीने पाला !
उस सुकुमार, कोमल
कुसुम को इन हाथो से मसल सकेगी !!

आपने मेरे लिए
 न जाने कितने सपने सजोयें थे !
सारी- सारी रात
बिना खाए पिए सोयी थे !!

लेकिन उसकी इन मिन्नतो का माँ पर कोई असर नहीं होता है .
फिर वो अपने दादा-दादी से कहती है

आपकी गोद में बैठ  कर खेलूंगी
आपसे अठखेलिया करूंगी  !
आपसे कहानियां सुनूंगी
आपसे तरह-तरह की पहेलियाँ करूंगी !!

दादा-दादी का जवाब बड़ा हे निर्मम आया .

तुम न जाने किस घड़ी में आयी
आते ही मेरे घर में तबाही मचाई !
हम कब से इस पल का इंतज़ार कर रहे थे
तूने ही हमारे जीवन में आग लगाई  !!



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