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Showing posts from February 18, 2013

हमें जीने दो

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#meremankee #book #rishabhshukla #onlinegatha
पापा ! पापा ! मुझे जीने दो मुझे आने दो ! इस अदभुत दुनिया की एक झलक तो पाने दो !!
मैंने क्या किया है बुरा जो तुम चाहते हो मारना ! मै तो अभी आयी भी नहीं और तुम चाहते हो मुझे निकालना  !!
पापा आप जब ऑफिस से घर आयेंगे थक हार कर चूर हो जायेंगे  ! फिर मै आपको पापा बुलाऊँगी आप सारी थकान भूल जायेंगे !!
मैं बिलकुल भी जिद ना करूंगी आप सब से डरूँगी  ! बड़े प्यार से रहूँगी कभी गुस्सा ना करूंगी !!
लेकिन हम तो एक बच्चा चाहते थे लड़का होनहार और सच्चा चाहते थे ! जो हमें चारो धाम की यात्रा और सेवा करेगा हम तो लडके के रूप में लाटरी चाहते थे  !!
तेरी शादी मै कैसे करूंगा बैंक का कर्ज मैं कैसे भरूंगा ! मेरी नौकरी भी चली जायेगी मैं तेरी परवरिश कैसे करूंगा !!
पापा ! मैं नौकरी करूंगी किसी के घर झाड़ू बर्तन ही करूंगी ! और धीरे-धीरे करके  सभी कर्ज भरूँगी  !!
आप सब की दिन-रात सेवा करूंगी आपके बुढ़ापे का सहारा बनूंगी  ! मुझे आने दीजिये मै आप सब की आंखो का तारा बनूंगी !!
फिर वो माँ से प्रार्थना करती है
माँ तू तो माँ है  फिर तू ऐसा कैसे करेगी ! क्या तू अपनी इस  नन्ही सी जान को कुचल सकेगी !!
जिस नन्ही सी जान…

हम कैसे जिये

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#meremankee #book #rishabhshukla
हम इस दुनिया में कैसे जिये, जहा हर  है तरफ है झूठ और मक्कारी !

जहा हमें बेबस , लाचार और मुर्ख, समझती है ये दुनिया सारी !!
हम इस दुनिया में कैसे जिए , अपनी खुशियों का पजामा कैसे सिये !
हो गयी है जिन्दगी मेरी जहर , इस कड़वे से सच को कैसे पीये !!
रोज-रोज मरता रहु इसलिए की , कल सवेरा मेरी अंतिम शाम न बने !
हर समय लगता है डर इस बात का , कही हमारा भी उन जैसा अंजाम न बने !!

मेरा परिचय

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#meremankee #book
मै कौन हूँ ये नहीं है जरूरी , मैंने क्या है पाया  मेरा रंग कैसा है !

मै  कैसा हूँ 
मै सोचता क्या  हूँ  मेरे पास कितना पैसा है !

इन  सवालों में ना जायें 
की ये किसी फ़िल्म के विलेन जैसा है !

डिग्री है कितनी 
पढ़ाई क्या की  सवाल तो गंवारों जैसा है !
तेरा नाम क्या  कहा से आया  अभी तक क्या-क्या कमाया !

तुम्हारी शादी हुयी की नहीं 
ये सभी सवाल तो  चाहने वालो जैसा है  !

मै तो शक्ल से काला 
बिलकुल काला  काली भैस जैसा हूँ  !

अक्ल से तो अल्हड़ 
मुर्ख और नकचिढ़ा  बिलकुल बैल जैसा हूँ  !

डिग्री है पाई मैंने 
मुर्ख , भोंदू , अल्हड़  और भी बहूत सारे !

लेकिन कमाई  में तो 
कुबेर जैसा हूँ  !

मेरे लिए तो 
कविता , काव्य  और कवि  !

ये सभी एक सुन्दर 
परिवार जैसा है  !

माँ

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#meremankee #book

माँ शब्द ही एक सुन्दर एहसास है ममता, उदारता, नम्रता प्रेम और सम्मान का  !
आशीर्वाद , निर्मलता ईश्वर और उसके विश्वास का !!
बेटा सदा माँ का लाडला सुन्दर और सुशील और कोमल होता है !
सदा पाँच साल का छुटकू बदमास और सुकुमार होता है  !!
बच्चा भी सदा माँ के पास महफूज, निर्भय और समशेर होता है !
एक पल भी माँ से जुदा नहीं रह सकता वो बच्चा बिना माँ के ढेर होता है !!
जब होता है बच्चा छोटा रखती है पास, पिलाती है दूध बच्चे को मातृत्व का एहसास होता है  !
जब बच्चा बड़ा होकर माँ की सेवा करता है तब माँ को भी अपनी ममता पर नाज होता है !!

एक प्रार्थना यमराज से

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#meremankee #book
एक दिन एक आदमी नरक पहुचा, और यमराज को ढुढा गली और कुचा | और काफी देर बाद उन्हे दिखा यमराज का घर, जहाँ थे कुछ भैसे तथा यमदुत सो रहे बेखबर ||
मैने जाकर उन्हे नीद से जागाया. उनसे पुछा यमराज कहा है, उन्होने बताया कि वो वर्ल्ड टूर पर गये है | फिर उन्होने कहा तुम यहा क्यो आये हो, घर से भागे या भगाये गये हो ||
पत्नी का मारा, किस्मत से बेसहारा, बेचारा, मै छोङ आया हूँ वो जग सारा | अब तो मै नही जीना  चाहता इसिलिये यहां आया, तो यमदुत ने पुछा क्या तुमने लायसेन्स है पास करवाया !
    चित्रगुप्त ने देखा उसका लेखा जोखा और बतलाया, अगले जन्म मे तुमने किये थे कुछ निच कर्म, और तुम्हारे नरक मे आने का नही हुआ है अभी टर्म | तब वह हठ करके वही बैठ गया और बोला, जब तक नही आते यम मै बैठुंगा यही अकेला ||
तब चित्रगुप्त ने यम को मिसकाल किया, तब जवाब मिला रोमिंग मे हूँ मिया | अंत मे यम ने लौटने का फैसला किया, और अगली ही फ्लाईट यमलोक के लिये लिया ||
यमराज आये और उस व्यक्ति को बुलाये, और कहा अपनी समस्या बताये | मुझे अपनी पत्नी से  बचने का कोई उपाय बताये, नही तो मुझे या उसे अपने पास बुलायें ||
इस संकट का …

पार्टी मे जाने के नियम

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#meremankee #book
जी हाँ, ठीक सुना आपने पार्टीयो मे जाने के भी कुछ नियम है,अगर ना गये नियम से तो भगाये जाओगे| अगर ना भगाये गये तो कुछ गम नही है, अगली बार ना बुलाये जाओगे ||
अब मै अपने साथ हुये एक वाकये को सुनाता हूँ, मै पहली बार एक पार्टी मे गया, मुझे रसगुल्ले बहुत पसन्द थे, मैने अपनी प्लेट मे दस-बारह रस्गुल्ले रख लिये | तो एक महाशय जो काफी देर से मुझे घुरे जा रहे थे, पास आये और बोले खुद खाओगे या है घर के लिये  ||
मै गुस्से से आग-बबूला हो गया, और मैने कहा कि मैने शर्म के मारे कम ही खाया | उन्होने फिर कहा आप क्यो शर्मा रहे है, शर्माना तो उसे चाहिये जिसने आपको बनाया ||
उस दिन तो जैसे पार्टी खत्म हुई.................. अगले ही दिन मेरे घर एक महाशय आये || और फरमाये....... कृपा करके मेरा निमन्त्रण पत्र दिजियेगा , और मेरे घर ना आने कि कृपा किजियेगा ||
मैने इसका कारण पुछा तो उन्होने बतलाया, मैने जब आपको पार्टी मे खाते हुये देखा तो खुद को कोसा |

गीत

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#meremankee 


एक दिन मै बैठा गीत लिख रहा था !
दर्द और प्रेम का संगीत लिख रहा था!!
निःशब्द और अक्षर का निर्जन गीत लिख रहा था ! बिना कगज और कलम के एक गीत लिख रहा था !!
निर्जन और विरानी दुनिया की तस्वीर लिख रहा था ! सास बहु के झगङो की उम्मीद लिख रहा था !!
कापते हुये हाथो से इतिहास लिख रहा था ! भारत की आजाती का इन्तकाम लिख रहा था !!
आजाद होकर भी भारत गुलाम हो रहा था ! भारत और पाकिस्तान का संग्राम लिख रहा था !!
रात और दीन की तस्वीर देख रहा था ! सारी दुनिया के एक होने की उम्मीद देख रहा था !!
सब कुछ लिखने के बाद सपनो की उम्मीद लिख रहा था ! अपने सपनो का छोटा सा गीत लिख रहा था !!