माँ - II

ममता और सौहार्द से बनी हुयी है माँ  !
कोई कहे कुमाता कोई माता लेकिन है माँ  !!

जिसके स्पर्श भर से बेटा  प्रसन्न हो उठता है !
जिसके उठने से ही सुरज भी उठता है !!

माँ  को देखकर बच्चा पुलकित  हो उठता है !
बच्चो को पाकर माँ  का रोम-रोम खिल उठता है !!

यौवन मे भी माँ  को बेटा लगता प्यारा !
बेटा समझ न पाता मन का है कच्चा !!

सारी दुनिया समझे उसे घोर कपुत !
माँ  को लगता बेटा सच्चा,वीर,सपुत !!

माँ  शब्द मे है ममता का एहसास  !
बरसो है पुराना माँ  का इतिहास !!

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