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Thursday, July 27, 2017

भगवान



जो मंदिरों के सामने,
माथा झुका लेते है|
मतलब के लिए कहते है,
राम नहीं जानते||

थोड़े से संकट में भी,
दया की भीख माँगते|
लेकिन फिर मुखर हो,
श्याम नहीं जानते||

कुछ भी हो बुरा,
तो कोसते है उस प्रभु को|
और पूजा और श्रद्धा हेतु,
भगवान नहीं जानते||

दुःख में कराहते,
तो राम नाम जपते|
खुशी के पलो में,
राम कहाँ मानते||

वोट के लिए है नेता,
राम पग पड़ते|
खादी पहने नेता सारे,
अयोध्या नहीं जानते||

सबका रोम-रोम है,
जुड़ा उस राम से|
उसी के आस्तित्व को,
हम नहीं मानते|| 

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