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Thursday, July 20, 2017

गौ माता


जो क़त्ल करते है, 
उन्हें कैसे बद्दुआ दू
बचपन से दुध मेरा ही तो पीया है||

मेरी पुछ पकड़कर खेला है ये,
कभी डरता, आगे आता और वापस चला जाता,
लेकिन सुख - दुःख में मेरे साथ ही तो जीया है||

माँ के बाद एक मै ही तो थी,
जो समझ सकती थी इसे,
कल इसे अपना दुध रुपी प्रेम,
आज शरीर भी दिया है||

अब ना इसे मेरी जरूरत रही,
और मै अब बूढी भी हो चली हूँ,
मुझे बेचकर चंद पैसे मिल जायेंगे इसे,
मैंने भी कब इनकार किया है ||

गर मेरे खून देखकर भी,
तेरे चहरे पर मिल जाए खुशी,
तो मै भगवान से खुद के लिए दो 
मौत मांग लिया है||

जो मेरी गर्दन काटेगा, 
वो भी तो मेरा ही बेटा है,
उसने भी तो बचपन में,
मेरा ही दुध पीया है ||

मेरी दुध के हर एक कतरा तेरा,
शरीर तेरा, मांस तेरा, जिस्म तेरा,
मेरी खुशी तो बस इतने में है की
सारे हिंदुस्तान ने मुझे अपनी माँ मान लिया है||

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